कांवड़ यात्रा
श्रावण में करोड़ों कांवड़िये हरिद्वार से गंगाजल ले जाते हैं। रूट, यातायात प्लान, घाट और प्रशासन की व्यवस्था — निवासियों और यात्रियों दोनों के लिए।
श्रावण मास (जुलाई–अगस्त) में कांवड़ यात्रा हरिद्वार का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब से करोड़ों शिवभक्त हर की पैड़ी और अन्य घाटों से गंगाजल भरकर पैदल अपने-अपने शिवालयों तक ले जाते हैं। इन हफ़्तों में शहर के भीतर यातायात बदल जाता है, स्कूल-दफ़्तरों के समय बदलते हैं और हाईवे पर एक दिशा कांवड़ियों के लिए आरक्षित हो जाती है।
यह हब निवासियों के लिए रूट-डायवर्ज़न और यात्रियों के लिए तैयारी — दोनों के लिए है।
एक नज़र में
- कब
- श्रावण मास — जुलाई से अगस्त
- जल कहाँ से
- हर की पैड़ी और आसपास के घाट
- मुख्य मार्ग
- दिल्ली–मेरठ–मुज़फ़्फ़रनगर–रुड़की–हरिद्वार
- निवासियों के लिए
- शहर में रूट-डायवर्ज़न, भारी वाहन प्रतिबंध
यातायात और रूट — ताज़ा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार घूमने आ सकते हैं?
निवासियों के लिए क्या बदलता है?
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