जापान के दो संत बने निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर, ऋषिकेश में वैदिक मंत्रों के बीच हुआ पट्टाभिषेक
ऋषिकेश के वीरभद्र महादेव मंदिर में जापान के दो साधकों का वैदिक मंत्रों के बीच पट्टाभिषेक हुआ। केन्ता इशियामा को श्री महादेव गिरी और दाईसाकू नारीता को श्रीकृष्णा गिरी नाम दिया गया
जापान से सनातन परंपरा से जुड़े दो साधकों को श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी में महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऋषिकेश स्थित वीरभद्र महादेव मंदिर में आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में स्वामी महादेवानंद गिरी और स्वामी कृष्णानंद गिरी को विधि-विधान के साथ महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई।
समारोह में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी, निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी, महंत दर्शन भारती सहित संत समाज के कई प्रमुख संत मौजूद रहे। निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर और विभिन्न अखाड़ों से आए संत-महापुरुषों ने दोनों संतों को तिलक-चादर प्रदान कर उनका अभिषेक किया।
जापानी साधकों को मिले नए संन्यासी नाम
समारोह के दौरान दोनों साधकों को संन्यास परंपरा के अनुरूप नए नाम भी प्रदान किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जापान के केन्ता इशियामा, जिन्हें वल्लालर के नाम से भी जाना जाता है, को संन्यास के बाद श्री महादेव गिरी जी महाराज के नाम से संबोधित किया गया। वहीं दाईसाकू नारीता, जिन्हें सेन्थिल नाथन के नाम से भी जाना जाता है, को श्रीकृष्णा गिरी जी महाराज नाम दिया गया।
दोनों संत महामंडलेश्वर स्वामी बालकुंभ पुरी महाराज की शिष्य परंपरा से जुड़े बताए जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बालकुंभ पुरी महाराज स्वयं मूल रूप से जापान से हैं और जापान में सनातन परंपरा तथा भारतीय आध्यात्मिक पद्धतियों से जुड़े लोगों के बीच सक्रिय रहे हैं।
जापान में सनातन परंपरा के विस्तार की जिम्मेदारी
पट्टाभिषेक समारोह में श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि अखाड़ा परंपरा में महामंडलेश्वर का पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि सनातन धर्म के संरक्षण और संवर्धन से जुड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों नवनियुक्त महामंडलेश्वर अपने गुरु की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जापान में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में योगदान देंगे।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने भी दोनों संतों को शुभकामनाएं देते हुए अखाड़ा और संत परंपरा के अनुरूप कार्य करने तथा सनातन के उत्थान में योगदान देने की बात कही। वहीं, अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी और महंत दर्शन भारती ने कहा कि विभिन्न देशों में भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ाव बढ़ रहा है और दोनों संत जापान में इस परंपरा को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।
पहले से चल रही थी तैयारी
जापान के साधकों को निरंजनी अखाड़े की जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया था कि जापान के छह साधकों को निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर की पदवी देने की तैयारी की जा रही थी। उस समय छह नामों—दाईसाकू नारीता, केंता इशियामा, हिरोकी ताकाहाशी, योशिमी मोरिया, मासाकी गोतो और ताकानोबू सोगा—का उल्लेख किया गया था। हालांकि जुलाई में प्रस्तावित पट्टाभिषेक कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था।
अब सितंबर के अंत में हुए समारोह में दो जापानी साधकों को औपचारिक रूप से महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई है। यह घटनाक्रम निरंजनी अखाड़े की जापान में सक्रिय धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आया है।
नवनियुक्त महामंडलेश्वर स्वामी महादेवानंद गिरी और स्वामी कृष्णानंद गिरी ने संत समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अखाड़े की परंपराओं का पालन करने और जापान में श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए कार्य करने की बात कही।
कोई भी पंक्ति चुनकर उसे उद्धरण के रूप में भी शेयर कर सकते हैं।
हरिद्वार की हर खबर, हर पर्व और हर तस्वीर — सबसे पहले Facebook और Instagram पर
Haridwar, every day — follow us on Facebook and Instagram
रील्स, तस्वीरें और लाइव अपडेट हमारे सोशल पेजों पर; पूरी खबरें, गाइड और कैलेंडर यहाँ वेबसाइट पर।
संबंधित खबरें
कनखल में तेज रफ्तार निजी बस की टक्कर से एयरफोर्स जवान की मौत, साथी गंभीर
छुट्टी पर हरिद्वार आए थे वायुसेना के जवान योगेश जादौन, बस का इंतजार करते समय हुआ हादसा; साथी अमित गंभीर घायल
Editor
5 Oct, 2026 : खानपुर में पुलिस पर फायरिंग, ज्वालापुर में बस हादसा और अन्य खबरें
आज की खबरों में खानपुर में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक आरोपी घायल हुआ, वहीं ज्वालापुर में तेज रफ्तार बस ने कई …
Editor
4 October 2026 : अर्धकुंभ 2027 के लिए रेलवे स्टेशन का विकास, जंगली हाथियों का उत्पात - दिनभर की प्रमुख खबरें
आज की खबरों में हरिद्वार रेलवे स्टेशन के विकास और नीलेश्वर महादेव मंदिर में हाथियों के उत्पात की प्रमुखता रही।
पर्यटन और यात्रा
Editor
बांद्रा टर्मिनस से अब हरिद्वार पहुंचेगी गरीब रथ, मुंबई से सीधी रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत
धार्मिक पर्यटन और तीर्थयात्रियों के लिए अहम कदम