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हरिद्वार में समोसा-पूरी-कचौड़ी के शौकीनों के लिए ये जगहें हैं खास

हर की पैड़ी और पुराने बाजारों की गलियों में घूमने निकलें तो सिर्फ गंगा दर्शन और मंदिर ही नहीं, यहां का स्ट्रीट फूड भी लोगों को आकर्षित करता है। समोसा और कचौड़ी हरिद्वार के उन नाश्तों में शामिल हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले यात्री भी पसंद करते हैं।

E Editorसत्यापित पत्रकार Editor 5 मिनट में पढ़ें
हरिद्वार में समोसा-पूरी-कचौड़ी के शौकीनों के लिए ये जगहें हैं खास

हरिद्वार आने वाले लोगों के लिए शहर के पुराने बाजार अपने आप में एक अलग अनुभव हैं। मंदिर और घाटों के बीच इन बाजारों में कई ऐसी पुरानी दुकानें हैं, जहां सुबह से लेकर देर रात तक समोसा-कचौड़ी खाने वालों की भीड़ दिखाई देती है।

अगर आप भी हरिद्वार घूमने आ रहे हैं और समोसा या कचौड़ी का स्वाद लेना चाहते हैं, तो इन जगहों को अपनी food list में शामिल कर सकते हैं।

1. पंजाबी लस्सी वाला - लंबे समोसे के लिए चर्चा में

हर की पैड़ी के पास गौ घाट और मोती बाजार का इलाका समोसे के लिए खास तौर पर चर्चित है। यहां पंजाबी लस्सी वाले नाम से जुड़े एक से अधिक प्रतिष्ठानों का उल्लेख मिलता है, जिसके कारण पर्यटकों को नामों को लेकर थोड़ा भ्रम हो सकता है। इस क्षेत्र में प्राचीन पंजाबी लस्सी वाला, मशहूर पंजाबी लस्सी वाला/मथुरा पंजाबी लस्सी वाला और शहर पंजाबी लस्सी वाला जैसे नाम सामने आते हैं।

इन दुकानों से जुड़े food videos में सामान्य आकार से काफी बड़े समोसे देखने को मिलते हैं। कहीं करीब 8 से 9 इंच तक के समोसे तो कहीं इससे भी लंबे समोसे दिखाए जाते हैं।


समोसे को चटनी के साथ परोसे जाने के अलावा यहां समोसा चाट, छोले और आलू की सब्जी के साथ भी मिलेगा। इसी इलाके में कचौड़ी और काला जामुन जैसे दूसरे items भी मिलते हैं।

कहां: गौ घाट/मोती बाजार, हर की पैड़ी के पास

2. कश्यप कचौड़ी भंडार - सुबह जल्दी उठने वालों के लिए

अगर आपकी पसंद समोसे से ज्यादा कचौड़ी है, तो कश्यप कचौड़ी भंडार का नाम स्थानीय नाश्ते की सूची में शामिल किया जा सकता है। सुबह-सुबह गरमा-गरम कचौड़ी और सब्जी खाने का अनुभव लेने वाले लोगों के लिए यह जगह खास हो सकती है। हरिद्वार में धार्मिक यात्रा के लिए जल्दी निकलने वाले यात्रियों के लिए भी सुबह का यह नाश्ता सुविधाजनक हो सकता है।


कहां: ठंडा कुआं, मोती बाजार रोड, हरिद्वार

समय: सुबह 4:30 बजे से 8:30 बजे तक

3. मोहन जी पूरी वाले - पूरी के साथ कचौड़ी भी

मोहन जी पूरी वाले का पता क्लासिक रेजीडेंसी, शंकर आश्रम के पास है। यहां बेडमी पूरी, दाल कचौड़ी, खस्ता कचौड़ी और आलू की सब्जी जैसे विकल्प मिलते हैं।

यानी अगर किसी परिवार में किसी को पूरी और किसी को कचौड़ी पसंद है, तो दोनों तरह के नाश्ते का विकल्प यहां मिल सकता है।

कहां: क्लासिक रेजीडेंसी, शंकर आश्रम के पास, हरिद्वार

4. मथुरा वालों की प्राचीन दुकान—कचौड़ी और समोसे के साथ मिठाइयां

चंदा कुआं, मोती बाजार की मथुरा वालों की प्राचीन दुकान का नाम भी पुराने बाजार की food list में आता है।

यहां कचौड़ी और समोसे के साथ मिठाइयां भी मिलती हैं। यहां समोसे को 'सिंघाड़ा' नाम से भी संदर्भित किया जाता है।


अगर आप हरिद्वार के पुराने बाजारों में घूमते हुए नमकीन के साथ मिठाई का स्वाद लेना चाहते हैं, तो इस तरह की पारंपरिक दुकानों को भी अपने food walk में शामिल कर सकते हैं।

कहां: चंदा कुआं, मोती बाजार, हरिद्वार

5. विष्णु दूध भंडार—1953 से जुड़ा नाम

हरिद्वार के मोती बाजार क्षेत्र में विष्णु दूध भंडार का नाम भी सामने आता है। यह प्रतिष्ठान 1953 से संचालित होने का दावा करता है। यहां कचौड़ी और समोसा चाट का जिक्र मिलता है। खासकर रात के समय यहां के food vlog और सोशल मीडिया पोस्ट दिखाई देते हैं।


दूध और पारंपरिक नाश्ते से जुड़े प्रतिष्ठान के रूप में इसका इतिहास भी इसे पुराने हरिद्वार के food culture से जोड़ता है।

कहां: मोती बाजार क्षेत्र, हरिद्वार

खास: कचौड़ी और समोसा चाट

हरिद्वार की गलियों में क्यों खास है समोसा-कचौड़ी?

हरिद्वार का food culture सिर्फ बड़े restaurants तक सीमित नहीं है। पुराने बाजारों की छोटी दुकानों और नाश्ते की दुकानों में शहर का एक अलग स्वाद मिलता है। सुबह जल्दी निकलने वाले स्थानीय लोग कचौड़ी-पूरी का नाश्ता करते हैं, जबकि हर की पैड़ी आने वाले पर्यटक शाम के समय समोसा, समोसा चाट या मिठाइयों का स्वाद लेते दिखाई देते हैं।

खास बात यह है कि अलग-अलग दुकानों की अपनी पहचान है। कहीं बड़े आकार का समोसा आकर्षण है, कहीं सुबह की कचौड़ी, तो कहीं कचौड़ी के साथ मिठाई।

पहली बार हरिद्वार आ रहे हैं तो यह ध्यान रखें

अगर आप इन दुकानों को घूमने की योजना बना रहे हैं तो मोती बाजार, गौ घाट और हर की पैड़ी के आसपास की कई जगहों को पैदल भी कवर किया जा सकता है। हालांकि भीड़ और बाजार की स्थिति के अनुसार समय अलग-अलग लग सकता है।

सुबह कचौड़ी खाने के लिए जल्दी निकलना बेहतर रहेगा, जबकि समोसा और समोसा चाट के लिए दिन के बाद का समय अधिक उपयुक्त हो सकता है। दुकान के खुलने का समय जाने से पहले स्थानीय स्तर पर जरूर जांच लें, क्योंकि छोटे प्रतिष्ठानों के समय बदल सकते हैं।

हरिद्वार घूमने आए हैं तो गंगा दर्शन के साथ शहर के पुराने बाजारों का यह स्वाद भी आपकी यात्रा का हिस्सा बन सकता है।

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